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Wednesday, October 10, 2007

बन्धन ,ठोकर

इन्सान अनेकों बंधनों की बेडियों में बंधकर संसार में आता है ! जन्म से ही संघर्ष की शुरूआत हो जाती है ! लेकिन संघर्ष की घड़ी में स्वयं का साहस और प्रभु की प्रेरणा,अपना पुरूषार्थ और प्रभु की प्रारथना से ही सफ़लता का सवेरा प्राप्त होता है !

दुनिया में समझाने के लिए बहुत ग्रन्थ हैं ,समझाने वाले संत भी बहुत हैं और जिंदगी को शिक्षा देने वाली ठोकरें भी बहुत हैं लेकिन दुनिया में फिर भी ऐसे लोग हैं ,जो ठोकरों पर ठोकर खाते रहते हैं ,पाताल में गिरते जाते हैं ,पर अपने आपको संभाल नहीं पाते !

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