Thursday, October 15, 2009

Fw: [ANANDDHAM.ORG] बोध कथाएँ

 
----- Original Message -----
From: mggarga
To: mggarga
Sent: Thursday, October 15, 2009 2:53 PM
Subject: Fw: [ANANDDHAM.ORG] बोध कथाएँ

 
----- Original Message -----
Sent: Thursday, October 15, 2009 2:47 PM
Subject: [ANANDDHAM.ORG] बोध कथाएँ

बोध कथाएँ
परमपूज्यश्री सुधांशुजी महाराज


प्रथम संस्करण : श्रद्धा पर्व २००९

प्रतियाँ :११००

मूल्य :६0  रुपये

सम्पादन :डा:नरेंद्र मदान




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Posted By Madan Gopal Garga to ANANDDHAM.ORG at 10/15/2009 02:28:00 PM

Saturday, October 10, 2009

Fw: [ANANDDHAM.ORG] महाराजश्री के आगामी कार्यक्रम

 
----- Original Message -----
Sent: Saturday, October 10, 2009 9:47 PM
Subject: [ANANDDHAM.ORG] महाराजश्री के आगामी कार्यक्रम

  • ८ से ११ अक्टूबर ,२००९ -- श्री गणेश लक्ष्मी महायग ,आनंदधाम आश्रम
    २२ से २५ अक्टूबर ,२००९ ---ध्यान-साधना ,रामनगर ,नैनीताल (उत्तराखंड )
    १ नवम्बर २००९ ---मासिक सत्संग (आनंदधाम आश्रम ,दिल्ली )
    २ नवम्बर २००९ ---पूर्णिमा सत्संग ( आनंदधाम आश्रम दिल्ली)
    ४ से ८ नवम्बर २००९ ------फरीदाबाद ( हरियाणा)
    १४ से १५ नवम्बर २००९ -- महिपालपुर ,दिल्ली
    २५ से २९ नवम्बर २००९ ---गुड्गावं ( हरियाणा )
    २ दिसम्बर २००९ ---पूर्णिमा , आनन्दधाम आश्रम दिल्ली
    ६ दिसम्बर २००९ --------मासिक सत्संग ,आनन्दधाम आश्रम दिल्ली
    १० से १३ दिसम्बर २००९ ----- सूरत गुजरात
    २३ से २७ दिसम्बर २००९ ------नागपुर महाराष्ट्र्
    ३१ दिसमबर २००९ -------पूर्णिमा ,आमनन्दधाम आश्रम दिल्ली


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Posted By Madan Gopal Garga to ANANDDHAM.ORG at 10/10/2009 08:19:00 PM

Thursday, September 24, 2009

Fw: [GURUVANNI] भावनायें

 
----- Original Message -----
Sent: Sunday, September 20, 2009 11:15 AM
Subject: [GURUVANNI] भावनायें

सृष्टि का आधार है गृहस्त आश्रम और सुखी गृहस्त का आधार है प्रेम एवं सहानुभुति ! घर परिवार में मनुष्य को प्रेम -सहानुभूती चाहिए !भावनायें संबंधों को मजबूत करने में बहुत काम आती हैं , बच्चे के जीवन में माँ बाप के वात्सल्य के बिना बहुत कुछ अविकसित रह जाता है !जहां प्रेम है वहां समर्पण भी है !शादी के समय वर कन्या एक दुसरे को हार पहनाते हैं , अगर उस हार के अन्दर का धागा टूट जाए तो फूल बिखर जाते हैं ! जैसे वह हार नहीं रहता ऐसे ही गृहस्त जीवन प्रेम के धागे से बंधा रहता है और प्रेम टूट गया तो परिवार बिखर गया !घर परिवार में प्रेम नहीं तो व्यक्ति कितना ज्ञानी ,कितना ध्यानी और कितना ही बली और बहादुर क्यों न हो मिट जायेगा !

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Posted By Madan Gopal Garga to GURUVANNI at 9/19/2009 03:57:00 PM

Saturday, September 19, 2009

Fw: [GURU VATIKA SE CHUNE PHOOL] भूल

 
----- Original Message -----
Sent: Friday, September 18, 2009 6:09 PM
Subject: [GURU VATIKA SE CHUNE PHOOL] भूल



  • भूल होना मनुष्य की प्रकृति है ! भूल को भूल मानकर सुधार करना संस्कृति है ! भूल को भूल न मानना विकृति है जो की व्यक्ति को पतन की और ले जाती है !


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Madan Gopal Garga द्वारा GURU VATIKA SE CHUNE PHOOL के लिए 9/18/2009 05:34:00 PM को पोस्ट किया गया