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Sunday, May 24, 2015

पशु-पक्षियों से मनुष्य




पशु-पक्षियों से मनुष्य को श्रेष्ट इसीलिए कहा गया है क्योंकि भगवान ने मनुष्य को बुद्धि दी है, सोचने समझने की शक्ति दी है। भगवान ने मनुष्य को सबसे बेहतर बनाया है। सभी पशु-पक्षी गर्दन झुका कर खाते हैं लेकिन सिर उठा कर खाने वाला तो केवल मनुष्य है। भगवान ने मनुष्य की रीढ़ की हड्डी ऐसी बनाई जो आकाश की ओर उठी हुई है। इसका मतलब है कि जितनी स्वतंत्रता भगवान ने मनुष्य को दी है उतनी और किसी को नहीं । भगवान ये भी चाहते हैं कि मनुष्य ऊंचा उठे तो इतना ऊंचा उठे कि आकाश की ऊँचाइयों छू ले।

Thursday, May 21, 2015

सत्संग की ज्ञान गंगा




सत्संग की ज्ञान गंगा से मन को पवित्र करके इस उचल कूद मचाते हुए मन को परमात्मा रुपी नाम की लोरी सुनते जाओ, तब यह मन परमात्मा में निमग्न होगा। 

Jo milne par





Jo milne par sadaiv khushi de, woh sajjan. Jo milne par dukh de, woh durjan. Tera jaana aisa ho ki sabki aankhon mein aansoon ho.
गुरुवर सुधांशुजी महाराज के प्रवचनांश

मन के पौधे को




मन के पौधे को संसार से उखाड़कर परमात्मा के दरबार में लगा दो, भक्ति से सीचना इस पौधे को। ज्ञान का जल, तपस्या की खाद डालना, यह मन भगवन का दर्शन कराएगा।