
दूसरों को समझाने के लिए अनेकों शास्त्र, दर्शन, तथा ज्ञान विज्ञान के ग्रन्थों को पढ़ने की आवश्यकता होती है! परन्तु स्वयं को समझाने के लिए उन सभी पर दृढ विश्वास और उनका आचरण करना होता है!
Param Pujya Sudhanshu Ji Maharaj
उचित योजना -कार्य में सफलता समय प्रबंधन -उन्नति का पथ शांत मस्तिष्क -क्ष्रेष्ठ चिंतन ध्यान की निरन्तरता - प्रभु की निकटता धनार्जन से पहले-श्रद्धा सृजन से पहले -सुयोजना कथन से पहेले -विचार जिस दिन आप अपनायेगे उसी क्षण आप आनंद की ओर बढ़ चलेंगे पूज्य सुधांशु जी महाराज
*तीसरी आँख प्रज्ञा की है ! जिसकी अन्दर की आँख खुली है वह कहीं ठोकर नहीं खा सकता !*जब चिन्तन समाप्त हो जाता है तब व्यक्ती पशुलोक के धरातल पर जीता है !*अगर स्वयं को कोसने ,प्रताडित करने और दबाने में लगे रहोगे टू कभी आगे न बढ़ सकोगे !*जीवन में किसी को आगे बढ़ता देख कर ईर्षयका जागना स्वाभाविक है लेकिन अगर ईष्या को प्रतिस्पर्धा में बदल सको तब तुम सहज ही आगे बढ़ जाओगे !
तुम प्रकाश हो! तुम्हारी शक्ती अप्रतिम है! लकिन तुम अपनी शक्ती को भूल गये हो! पिता परमात्मा ने तुम्हें ज्योतिरूप में इस जगत में भेजा है! तुम्हें अपने हिस्से का प्रकाश फैलाना है! जहाँ भी रहो उस स्थान को प्रकाशित करते रहो!
Param Pujya Sudhanshu Ji Maharaj