एक नकारात्मक विचार स्वास्थय ख़राब कर सकता है टू यह भी ध्यान रखी की सकारात्मक विचार स्वास्थ बना भी सकता है! मान अपमान में सदा एक जैसा रहना, चंचलता को छोड़ना, स्थिरता को अपनाना, सदैव खुश रहने की आदत डालना! इन सब कार्यों में आत्मा बलवान होती है! जाप और सेवा से आपकी आत्मा बलवान होगी! सेवा कार्य कोई हाथ में आए उसे बड़ी श्रृधा से करो! कई लोग सेवा करते हुए भला-बुरा कह देते हैं उनको आप हंसते हुए सुन लें!
पूज्यश्री सुधान्शुजी महाराज
धर्मदूत अप्रैल-२००८
समय का नाश सर्वस्य का नाश है, इसलिए इस बहुमूल्य निधि को व्यर्थ न गवाएँ १जो समय व्यर्थ चला गया वह पुन; प्राप्त नहीं होगा! समय का उपयोग ऐसे करें की शारीरिक, आत्मिक और सामाजिक स्तर पर आप उन्नत हो सकें! आपके कर्मों की सुगंध लंबे समय तक महकती रहे! आप समय को अच्छाई की सुगंध या बुराई की सुगंध में बदल सकते हैं! जो समय चला गया उस के लिय मत रोओं और उसका विचार भी मत करो! व्यक्ती कितना भी बीते समय को याद कर कर के रता रहे, जो बीत गया सो बीत गया! वह लौटकर वापिस नहीं आएगा!
अत: वर्त्तमान को सभालो !पूज्य sudhaanshu ji mahaaraaj
dhrmduut aprel 2008 se
लक्ष्य की प्राप्ती के लिय दृढ इच्छा शक्ती, कठोर अनुशासन, सही योजना,सुव्यवस्थित जीवन और कड़ी मेहनत, दूर द्रष्टि रखिए, दूर तक देखिए, यह अपनाकर जब आप चलेंगे तो कैसा भी लक्ष्य हो जरूर प्राप्त होगा! भाग्य के भरोसे नहीं बैठना कर्मठ बनाना! तब बात बनेगी !
परम पूज्य सुधान्शु जी महाराज
संत पुरूष समझाते हें की बचपन से ही अपने बच्चों को अच्छे संस्कार दो, उन्हें नियम पर चलना सिखाओ, उन्हें बाँट कर खाना, मिलकर रहना, सबकी सहायता करना, और प्रभु सिमरन करना सिखाओ !
अपना हिस्सा खालेना प्रक्र्ती ,
दूसरों का हिस्सा भी खाजाना विक्रती ,
अपना हिस्सा भी दूसरों को दे देना सन्स्कर्ती ,कहलाती है !
Vishwa Jagriti Mission
Param Pujya Sudhanshuji Maharaj