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Wednesday, April 16, 2008

तुम प्रकाश हो


तुम प्रकाश हो ! तुम्हारी शक्ति अप्रतिम है ! लेकिन तुम अपनी शक्ति को भूल गये हो ! पिता परमात्मा ने तुम्हें ज्योतिरूप में इस जगत में भेजा है ! तुम्हें अपने हिस्से का प्रकाश फैलाना है! जहाँ भी रहो उस स्थान को प्रकाशित करते रहो!
धर्मदूत मार्च २००८

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