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Thursday, November 6, 2008

लक्ष्य

  • विश्व जाग्रति मिशन
  • जो अपने लक्ष्य के प्रति पागल हो गया हो उसे ही प्रकाश का दर्शन होता हे !जो थोडा इधर थोडा उधर हाथ मारते हें वे कोइ लक्ष्य पूर्ण नहीं कर पाते ! वे कुछ क्षणों के लिये बडा जोश दिलाते हें ,किन्तु यह शीघ्र ठंडा हो जाता हे !
    पूज्य सुधान्शुजी महाराज
  • One Price $565 Anywhere in India

Sunday, November 2, 2008

विद्या का प्रसार करना आपका कर्तव्य है

एक प्राध्यापक आपके जीवनकाल में सहस्त्रो विधार्थियों को ऍम ऐ करा देता है फिर भी उसके ज्ञान में कोई न्यूनता नहीं आती। एक दीपक लाखों को जला देता है। उसके प्रकाश मै कोई न्यूनता नहीं आती। विद्यां का नियम है की चाहे कितनी भी विद्या खर्च हो जाए तो भी देनेवाले की पुरी विद्या में कमी नही आती। हालाकि उसकी विद्या उपयोग करने से बढती है।

Vishwa Jagriti Mission

Tuesday, October 28, 2008

# जब भी बोलो यह सोच कर बोलो

Sunday, October 5, 2008

प्रेम - Love

  • विश्व जाग्रति मिशन
  • प्रेम और परमात्मा पर्यायवाची शब्ध हैं। प्रेम शब्ध का प्रयोग सिवाय परमात्मा और गुरुजनों के कहीं करना नहीं चाहिये , बाकी सब प्रेम नहीं आसक्ति है।