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Saturday, October 13, 2007

आत्मकल्याण के सूत्र


शुन्य के साथ कितने भी शुन्य जोडों लेकिन उनका कोई मूल्य नहीं। इसी प्रकार संसार की सारी भौतिक संपदा आपके पास हो लेकिन परमात्मा के बिना उसका कोई मूल्य नहीं।

उपयोगी है :

(१) भोजन, जो पच जाय।

(२) धन, जो जीवन में काम आए।

(३) रिश्ता, जिसमें प्रेम हो।

भगवान् यदि परिक्षा लेटा है तो पहले योग्यता भी देता है।
वह व्यक्ति धरती की शोभा बनता जो अवसर को पहचाने और जीवन की सबसे कीमती वस्तु समय को व्यर्थ न जाने दें।

एकांत और मौन व्यक्ति को महान बनाता है।

बुराई इसलिए नहीं पनपती कि बुरा करने वाले लोग बढ़ गये हैं वरन इसलिए पनपती है कि उसे सहन करनेवाले लोग बढ़ गये हैं

संगठित होकर किसी महान लक्ष्य को पाने का मूलमंत्र है एक दुसरे को सह लेना।

पूज्य सुधान्शुजी महाराज